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बालू की किल्लत से लोग परेशान, मजदूर पहुँचे भुखमरी के कगार पर

        डीके यादव

कोंच (गया) प्रदेश में चली आ रही बालू की किल्लत से लोग परेशान हैं। बालू न मिलने से लोगों को आवास बनाने में दिक्कत हो रहा है। वहीं, मकान में काम करने वाले राज मिस्त्री तथा मजदूरों के काम न मिलने से भुखमरी का संकट आ गया है। राज्य के आठ जिलों नवादा, वैशाली, अरवल, बांका, बेतिया, मधेपुरा, किशनगंज और बक्सर जिलों में शनिवार से बालू का खनन शुरू हो जाएगा। शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में इसे हरी झंडी दी गई। इन जिलों में पहले की बंदोबस्ती में 50 फीसदी अतिरिक्त शुल्क के साथ खनन की अनुमति के प्रस्ताव को सहमति मिली है। इसके लिए छह महीने यानी 31 मार्च 2022 तक पहले की बंदोबस्ती के आधार पर बालू खनन का अवधि विस्तार दिया गया है। वहीं पटना, भोजपुर, सारण, औरंगाबाद, रोहतास, गया, जमुई और लखीसराय के आठ जिलों में बालू खनन के लिए नए सिरे से निविदा जारी की जाएगी। इसकी जिम्मेदारी बिहार खनिज विकास निगम को दी गई है। खान एवं भूतत्व विकास की ओर से इसका प्रस्ताव लाया गया था। कैबिनेट की बैठक में इस पर मुहर लगा दी गई। इन आठ जिलों में अधिक बोली लगाने वालों को बालू घाटों का आवंटन किया जाएगा। उसके बाद राज्य सरकार की ओर से तय प्रक्रिया के तहत उपभोक्ताओं तक बालू की बिक्री की जाएगी। खनन विभाग की ओर से तय प्रस्ताव में लॉटरी से बालू घाटों के आवंटन का भी विकल्प दिया गया था। परंतु निविदा में अधिक बोली लगाने वालों को ही खनन का ठेका देने पर सहमति बन पाई है। राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में 16 जिलों में बालू खनन प्रक्रिया को हरी झंडी मिलते ही अटकलों का दौर खत्म हो गया है। प्रदेश के अन्य 317 बालू घाटों का मामला अदालत में विचाराधीन है। उनके बारे में न्यायिक फैसला आने के बाद ही खनन की प्रक्रिया शुरू हो पाएगी। वहीं, मंझियावां पंचायत के ग्राम बिजहरी निवासी योगीराज यादव ने कहा कि मैं बहुत वर्ष पहले से रखे गए बालू के सहारे अपने घर में प्लास्टर का कार्य करवाया और अब वह बालू समाप्त हो गया है। बालू मंगवाने पर पुलिस बालू लदे ट्रैक्टर को जप्त कर लेती है और आगे की कानूनी कार्यवाही करती है। उन्होंने सरकार से पूछा है कि लोगों के मकान आखिरकार कैसे बनेंगे? वहीं, राजमिस्त्री जहाना निवासी रमेश पासवान तथा तपेश्वर पासवान, कठौतिया निवासी शिव बरत मांझी , कराई निवासी योगेन्द्र पासवान , खेपुर निवासी नागेंद्र यादव , सिमरा निवासी राम अकबाल यादव आदि ने बताया कि छड़ , सीमेंट , छरी आदि मिल रहे हैं लेकिन बिना बालू के वह सब अधूरा है। हमसब के सामने काम के अभाव में भोजन पर भी संकट हो गया है और हम सब भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। मजदूर काम के अभाव में दिल्ली, मुम्बई, सूरत जैसे बड़े शहरों की ओर अब आस लगाना शुरू करना चाहते हैं और इस क्षेत्र से पलायन को विवश हैं। बिहार सरकार से मजदूरों ने बालू चालू करने की मांग की है।

 

 

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