राजनीति

राजनितिक संघर्षों से बढ़ा कद, बनाई नई पहचान

ऐसे हुआ पूर्व ज़िला पार्षद का राजनीति में औपचारिक प्रवेश 

विशेष समाज सेवा की भावना से राजनीति में आये पूर्व ज़िला पार्षद दिनानाथ विश्वकर्मा ने ज़िला परिषद क्षेत्र संख्या 11 में जन सेवा का अनूठी छाप छोड़ी है। समाज की यथा स्थिति को ना केवल उजागर किया, बल्कि दबे-कुचले व गरीब-मजदूर की आवाज को बखूबी बुलन्द किया। इस बार बिहार पंचायत चुनाव 2021 में सीट आरक्षित होने के कारण चुनाव नहीं लड़ सके। अत्यंत निम्न वर्ग से आने वाले दिनानाथ का बचपन जहां गरीबी में बीता आज वहीं 50 वर्ष की उम्र में बिना किसी पद के जनता की सेवा कर रहे हैं। उनका न तो राजनीतिक बैकग्राउंड रहा है और न ही कोई राजनितिक पितामह। लेकिन समाज की दयनीय दशा देखकर उनके मन में बेहद कुंठा व वेदना का गहरा अहसास हुआ। तेज तर्रार स्वभाव के कारण लोगों की आग्रह और समाज की यथा स्थिति के कारण राजनीति में औपचारिक रूप से प्रवेश हुआ। जनता का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्हें कई सुविधाएं दिलवाईं। राजनीतिक जीवन में गरीबों, मजदूरों, पिछड़ों और समाज के शोषित वर्गों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक आदि क्षेत्रों में अनूठे संघर्ष किये और अनंत कष्ट झेले। बाबजूद जनता सेवा की भावना नहीं छोड़े।

राजनीतिक जीवन : दिनानाथ विश्वकर्मा की राजनीतिक पाठशाला की शुरुआत वर्ष 1990 में भारतीय जनता पार्टी के साथ हुई। इसके बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आर.एस.एस) के सक्रिय सदस्य बने। लेकिन समय बीतता गया उपलब्धियों को वह अपने झोली में समेटते गए। उन्हें कर्मठ और निष्ठावान कार्यकर्ता के तौर पर जाना जाता हैं। वर्ष 1990-1994 में रफीगंज के भाजपा महामंत्री बने। 1994-2000 में रफीगंज भाजपा नगर अध्यक्ष तथा 2005-2011 में भाजपा जिला उपाध्यक्ष बनाए गये। इसके अलावा वर्ष 2005-2013 में अनुमंडल अनुसंधान समिति के सदस्य बनें। 2018 में भाजपा जिला कार्यसमिति के सदस्य बने। जिला योजना समिति सदस्य सह रफीगंज स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के सचिव बनाये गये। इसके बाद वर्ष 2011 में क्षेत्र संख्या 11 से जिला पार्षद का चुनाव लड़े। लेकिन इस बीच सफलता नहीं मिली। फिर भी उन्होंने मन से हार नही मानी और जन सेवा भावना से जनता के बीच के मजबूत कड़ी बने रहे। इसी क्रम में वर्ष 2012 में रफीगंज नगर पंचायत क्षेत्र संख्या 09 से अपनी पत्नी को वार्ड पार्षद पद से चुनाव लड़ाया और जीत हासिल किया। हालांकि इस जीत के बाद पत्नी को भाजपा महिला मोर्चा रफीगंज नगर अध्यक्ष बनायी गयी। विभिन्न राजनीतिक पदों पर रहते हुए पार्टी व जनता में अपनी एक अलग पहचान बनाई। दशकों से जनता की सेवा और राजनीतिक संघर्ष के बाद वर्ष 2016 में पुनः जिला पार्षद का वे खुद चुनाव लड़े जिसमें जनता ने उनके राजनितिक व समाजिक सरोकार को समझा और इस बार चुनाव में जीत हासिल किया।

श्री विश्वकर्मा बताते है कि मेरे जीवन में 09 तारिख काफी लक्की रहा है। इसी दिन उनकी शादी हुई थी। इस दिन हमारी पत्नी वार्ड पार्षद बनी। वहीं, हम भी इसी दिन जिला पार्षद बने। अपने जिला परिषद क्षेत्र में विभिन्न पंचायतों अंतर्गत कई विकासात्मक कार्य कराएं जिसमें नल्ली-गल्ली, ईट सोलिंग तथा प्राणपुर गांव में सांसद सुशील सिंह के सौजन्य से लोकल बाजार का उद्घाटन किया गया है। यह बाज़ार बुधवार और शनिवार को लगता है। बताते हैं कि इससें स्थानिय लोगों को रोजगार भी प्राप्त हो रहा है जिस किसान को अपनी फसल को 15-20 किलोमिटर दूर जाकर बेचना पड़ता था। अब उन्हें स्थानिय बाज़ार में रोजगार करने का अवसर मिल रहा है।

कार्य : श्री विश्वकर्मा बताते है कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जूझ रहे महादलित टोला में बिहार सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत जिला कल्याण विभाग द्वारा हमारे सहयोग से समुदायिक भवन शेड का निर्माण किया गया हैं। केन्द्र सरकार तथा बिहार सरकार की कई योजनाओं की प्रशंसा करते हुए। जन कल्याणकारी बताया है जिसने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, उज्जवला योजना, जल जीवन हरियाली सहित पर्यावरण के क्षेत्र में किये जा रहे बेहतर कार्य शामिल है। उन्होंने जलजीवन हरियाली के तहत पेड़ पौधो को संरक्षित करने की बाते कही है। उन्होंने सार्वभौमिक स्वच्छता प्राप्त करने के लिए किये जा रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किये जा रहे प्रयासों में काफ़ी उचित क़दम बताया है। बताया कि 2 अक्टूबर 2014 से स्वच्छ भारत मिशन को राष्ट्रीय आन्दोलन के रूप में देशभर में शुरू किया गया था। स्वच्छ भारत अभियान भारत सरकार का सबसे महत्त्वपूर्ण अभियान है।

शैक्षणिक योग्यता: 12 वीं

जम तिथि : 01.12.1994

पैतृक गांव: रफीगंज प्रखंड के चेव पंचायत अंतर्गत प्राणपुर 

विचार : बताते है कि समाज सेवा से बड़ा कोई पुण्य कार्य नहीं है। समाज सेवा अगर निस्वार्थ भाव से की जाए तो मानवता का कर्तव्य सही मायनों में निभाया जा सकता है। हम सब समाज के अभिन्न हिस्सा है। जिंदगी में उम्र बढ़ने पर भीतर का व्यक्ति कहीं दब जाता है और नया व्यक्ति उभरकर आता है। उम्र बढ़ी हम जवान हुए। पर बचपन खत्म नहीं हुआ। हमारे भीतर कहीं दुबका है। जवानी के बाद बुढ़ापा आया, तो जवानी भीतर कहीं अंगड़ाई ले रही होती है। हर उम्र परत बनकर ढंक जाती है। ऐसे ही परिस्थितियों के साथ होता है। हर बदले हुए हालात के पीछे पुराने हालात रहते ही हैं।

Admin

The purpose of this news portal is not to support any particular class, politics or community. Rather, it is to make the readers aware of reliable and authentic news.

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button