क्राइम

मतदाताओं के आशीर्वाद से जिला परिषद क्षेत्र संख्या 11 से नहीं रूकेगी निवर्तमान ज़िला पार्षद शंकर यादवेन्दू का विजय रथ

औरंगाबाद। सातवें चरण के चुनाव में निर्वतमान जिला पार्षद शंकर यादवेन्दू ने औरंगाबाद समाहरणालय स्थित शुक्रवार को नामांकन पत्र दाखिल किया। इस मौके पर हजारों समर्थकों ने उन्हें फूल माला पहनाकर जोरदार स्वागत किया और पक्ष में जीत के नारे लगाए गये। शंकर यादवेन्दू मत घबराना तेरे पिछे जिला परिषद क्षेत्र संख्या 11 की महान जनता। वहीं प्रत्याशी ने समर्थकों का अभिवादन स्वीकार करते हुए। उनके प्रति आभार प्रकट किया। कहा कि जिस उम्मीद और विश्वास के साथ क्षेत्र की जनता ने एक बार फिर भरोसा जताया है। वहीं चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया है उसका मैं सदैव उचित मूल्यांकन करूंगा। समाज सेवा की संकल्प एवं विकास की रफ्तार कभी कम नहीं होने दूंगा। यह समय किये गये विकासात्मक कार्यो एवं बड़े-बड़े वादों व दावें का नहीं है बल्कि जनहित के संकल्पों के साथ एक बार फिर मिली जिम्मेदारीयों को निर्वहन करने का है। कहा कि राजनीति केवल वोट बटोर कर सत्ता पाने का एक साधन नहीं हैं, बल्कि राजनीति समाजहित और जनहित का एक सशक्त माध्यम हैं। आम जनमानस में धरातल पर बदलाव के लिए राजनीति आवश्यक है। इससे हमने समाज के दबे-कुचले और उपेक्षित लोगों का सामाजिक-आर्थिक विषमताओं को दूर करने में सफलता पायी है। इन्हीं उद्देश्यों के साथ आगे भी संघर्ष जारी रखूंगा। ताकि जनता को इसका लाभ मिलता रहे। यह राजनीति सामाजिक न्याय के ऐसे बदलाव का सजग प्रहरी हैं जिसकी कल्पना अनेक क्रांतिकारी नेताओं एवं विद्वानों ने समाज और देश की कल्याण के लिए किया है। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन, राजनीति को समर्पित कर दिया। चाहे वह सुभाष चंद्र बोस हो या फिर सरदार वल्लभ भाई पटेल या फिर अन्य देश के प्रति प्राण न्योछावर करने वाले लोगों ने उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद भी राजनीति को ही अपना कर्मक्षेत्र बनाया। वहीं युगपुरुष एवं महान समाज सुधारक बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर जैसे उच्चकोटि के विद्वान, महापुरुष एवं नीति-निर्माताओं ने भी जिन संकल्पों के साथ हमें हमारा संविधान दिया। संरक्षक की भांति अपनी भूमिका निभाई। कहा कि हमारा उद्देश्य जन सेवा करना है और इन्हीं मूलमंत्रों एवं जनता की प्रेरणा से चुनावी मैदान में आया हूं। जय या पराजय जनता के हाथों में है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता मालिक होती हैं। मैं जनता से वादा नहीं, विकास करूंगा। अधूरे कार्यों को पूरा करूंगा। जनहित में शिक्षा स्वास्थ और रोजगार पर आधारित संघर्षों को हमेशा जारी रखूंगा। जनता के बीच नेता नही बल्कि साधारण व्यक्ति के तौर पर जनहित में समर्पित रहा हूं। जनता को जहां भी आवश्यक हुआ वहां खड़ा रहा हूं। जनता वोट की कीमत को समझे। जहां एक वोट किसी की जय तो किसी की पराजय का कारण बन सकती हैं। यदि राजनीति पूरी तरह से सही और सकारात्मक दिशा में प्रयोग की जाए तो विकास के नए शिखर प्राप्त किये जा सकते हैं और मानवता की सेवा भी की जा सकती है। वहीं जिला परिषद क्षेत्र संख्या 11 को निरंतर आगे बढ़ाया जा सकता है। राजनीति समाज को जागरूक और संवेदनशील बनाकर उसे अपने अधिकारों के प्रति अवगत कराकर सशक्त बनाने की दिशा में प्रेरित किया जा सकता हैं।

 

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