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समाज हित में इस मामले का नितांत हैं आवश्यक

विशेष। देश की कानून व्यवस्था हमेशा महिलाओं की पक्ष धर रही है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि बहुत सी महिलाएं कानून को अपने फायदे के लिए भी प्रयोग करती हैं। मेरे इस लेख के पिछे महिलाओं के असुरक्षा की बात करना कतई नहीं है। क्योंकि एक महिला की गहना इज्जत ही होता हैं। इसकी कीमत सिर्फ एक महिला को ही पता है। हालांकि इस पुरुष प्रधान समाज में इनका संरक्षण सख्त आवश्यकता है। लेकिन कई बार ऐसे हालात भी उजागर होते हैं जिनमें महिलाएं ही पुरुषों पर हावी नजर आती हैं। इसका सीधा एवं शायद एकमात्र कारण कानून बनता है। महिला के आरोप मात्र से पुरुष के सम्मान व गरिमा मुकदमा के चक्कर में प्रभावित होती है। उसकी बेइज्जती की भरपाई पैसे से नहीं की जा सकती है। मुकदमे से बरी होने से उसे केवल कुछ राहत मिल सकती हैं। आज कल हर कोई महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा के लिए संघर्ष कर रहा है। वहीं, कुछ महिलाएं अपने मामूली फायदे के लिए उनके सुरक्षा के लिए बने कानून का गलत इस्तेमाल कर रही हैं। कहीं पैसे ऐंठने के लिए विभिन्न तरह के काल्पनिक घटनाएं तैयार की जाती है तो, कहीं ग्रुप बनाकर महिलाएं पुरुषों को लक्ष्य कर रही हैं, तो कहीं मर्जी से बनाए संबंधों को बाद में दुष्कर्म बता दिया जाता है। यही नहीं पारिवारिक रिश्तों में भी आजकल इस तरह के झूठे आरोप काफी लगने लगे हैं। भले ही महिला द्वारा लगाए गए आरोप झूठे और बेमानी हों लेकिन समाज में महिला आज भी एक पीड़िता के रूप में ही देखी जाती है। खैर ऐसा भी नहीं है कि सभी महिलाएं झूठी तथा पुरुष शोषक की भूमिका में ही रहते हैं लेकिन अगर परिस्थितियों का निष्पक्ष रूप से विश्लेषण किया जाए तो यह समाज के हित के लिए नितांत आवश्यक है। यह सब समाज की बिगड़ती दिशा का नतीजा है कि कुछ लड़कियां अपने पिता, भाई या रिश्तेदार पर भी ऐसे झूठे आरोप लगाने में नहीं हिचकिचाती हैं जिसके कारण उन्हें वर्षो कोर्ट के चक्कर काटने पड़ते हैं। इसका बड़ा कारण लव मैरिज है।

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