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धनवन्तरि जयन्ती में लोगों ने बाजारों में की खरीदारी

                  – डीके यादव

गया। कोच प्रखंड के आंती, ददरेजी, काबर, देवरा बाजार में धनतेरस को लेकर बहुत भीड़ भड़ाक के साथ मार्केटिंग करते लोग देखे गए। वही महालक्ष्मी के अराधना के लिए दीपों का त्योहार दीपावली तीन दिनों के क्रम में प्रथम दिन कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी धनतेरस का स्थान आता है। जहां किसी कारण से दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजा नहीं होती है। वहां धनतेरस को ही लक्ष्मी पूजा की जाती है। मध्य रात्रि या घर के सभी सदस्यों को बाहर से घर में आ जाने के बाद थोड़ी रात्रि व्यतीत होने पर यम के नाम से दीप बाहर निकालते हैं जिस कारण से आज के दिन को “यमदीरी” के नाम से भी जानते हैं। कहा जाता है कि समुद्र मंथन से चौदह रत्न प्राप्त हुआ था जिसमें प्रथम महालक्ष्मी हैं। साथ ही आयुर्वेद-शास्त्र के जनक धनवन्तरि का जन्म भी आज के दिन होने के कारण “धनवन्तरि जयन्ती” भी कहते हैं जो कि चिकित्सकों के लिए विशेष उत्सव का काल माना जाता है।चौदह रत्नों में एक धनवन्तरि कि पूजा कर के चिकित्सक उत्सव मनाते हैं।

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