राजनीति

बढ़ती महंगाई के बदलते पैमाने व मायने से सरकार अचेत, जनता त्रस्त: उमेश

औरंगाबाद। बढ़ती बेरोजगारी व महंगाई को लेकर जन अधिकार युवा परिषद (लोकतांत्रिक) बिहार के प्रदेश सचिव उमेश कुमार यादव ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि देश के छात्र-नौजवान व मजदूर-किसान को एकजुट होने की जरूरत है। आज देश की सबसे गंभीर व ज्वलंत मुद्दा महंगाई और बेरोजगारी है। महंगाई के कारण खाद्य वस्तुएं, डीजल-पेट्रोल एवं गैस के दाम आसमान छू रहे हैं। देश में लगातार बढ़ती महंगाई अब बेकाबू हो गयी है जिससे आम जन जीवन अस्त व्यस्त सा हो गया हैं, बावजूद सरकार मस्त है। विडंबना यह है कि गरीबी के पैमाने व मायने बदलने को लेकर काफ़ी आलोचनाओं के बावजूद सरकार सचेत नहीं हो रही है। यानी सरकार के पास कीमतें बढ़ने के हर तर्क मौजूद हैं, मगर उन्हें रोकने का एक भी उपाय नहीं है। वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि ने गरीब आम-अवाम को जीना मुहाल कर दिया है। मगर सरकार कुछ भी सुनने व कहने को तैयार नहीं है। कहा कि पिछले दो साल से देश की जनता कोरोना महामारी की चपेट में है और दूसरे तरफ मंगाई चरम सीमा पर है जिससे देश की जनता त्राहिमाम कर रही है और सरकार कान में तेल डालकर सोई हुई है। कहा कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तब आज की तुलना में तब महंगाई आधी से भी कम थी। उस समय भाजपा नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सड़कों पर विरोध व जगह जगह नौटंकी एवं डरामें किया करते रहते थे। लेकिन आज महंगाई पर मोदी व भाजपाई बोलने के लिए तैयार नहीं है। महंगाई पर मोदी भक्त लोग कहते हैं कि देश में और कई तरह के विकास हो रहे है इसलिए महंगाई बढ़ रही है जिन्हें मोदी के सिवा और कुछ नहीं दिखता की हमारे देश के कई धरोहर एवं सरकारी संपत्ति को निजीकरण के तहत ओने पौने दामों में अदानी अंबानी के हाथों गिरवी रख दिया गया है।

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